
गुरुग्राम। गुरुग्राम में डीएलएफ-3 स्थित एंबियंस आइलैंड सोसायटी में वाटर हैजार्ड में डूबकर दो बच्चों की मौत के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि मजदूर बस्ती से आए चार बच्चे खेल-खेल में करीब तीन फुट ऊंची ग्रिल फांदकर गोल्फ कोर्स के भीतर पहुंच गए थे। वहां बने गहरे कृत्रिम तालाब में नहाने के दौरान दो बच्चे डूब गए।
अक्सर अंदर पहुंच जाते हैं बच्चे
स्थानीय लोगों का आरोप है कि एंबियंस आइलैंड सोसायटी के चारों तरफ न तो मजबूत बाउंड्री वाल है और न ही तारों की फेंसिंग सही स्थिति में है। इसी का फायदा उठाकर आसपास की झुग्गियों और मजदूर बस्तियों के बच्चे अक्सर अंदर पहुंच जाते हैं।
बताया जा रहा है कि जहां हादसा हुआ वह गोल्फ वाटर हैजार्ड करीब 15 से 20 फुट गहरा है और लंबे समय से गोल्फ गतिविधियों के लिए भी इस्तेमाल नहीं हो रहा।
स्थानीय लोगों के अनुसार डीएलएफ-3 क्षेत्र के नाथूपुर इलाके में मजदूर परिवार रहते हैं। गुरुवार शाम खेल-खेल में चार बच्चे कृष्ण कुमार, आदर्श, सतीश और अंकुश नहाने की योजना बनाकर बस्ती से निकल पड़े।
अंदर चले गए और तालाब में उतर गए
बच्चे पहाड़ी रास्ते और धंचारी प्लांट के पास से होते हुए एंबियंस आइलैंड के पीछे स्थित गोल्फ कोर्स तक पहुंच गए। वहां तीन फुट ऊंची ग्रिल पार कर सभी अंदर चले गए और तालाब में उतर गए।
नहाने के दौरान कृष्ण और आदर्श गहरे पानी में चले गए। काफी देर तक दोनों बाहर नहीं आए तो साथ मौजूद अन्य बच्चों ने शोर मचाकर लोगों को जानकारी दी। सूचना मिलने पर डीएलएफ फेज-3 थाना पुलिस मौके पर पहुंची।
पुलिस ने रस्सियों की मदद से काफी मशक्कत के बाद दोनों बच्चों के शव तालाब से बाहर निकाले। पुलिस ने बताया कि शुक्रवार को पोस्टमार्टम के बाद शव स्वजनों को सौंप दिए गए।
कुछ साल पहले भी हुई थी ऐसे ही घटना
मृतक कृष्ण का परिवार नाथूपुर जबकि आदर्श का परिवार बिहार के गया जिले के गांव कामद का रहने वाला है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ साल पहले भी डीएलएफ क्षेत्र में दो बच्चों की डूबने से मौत हुई थी, लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा इंतजाम मजबूत नहीं किए गए। अगर सोसायटी के गोल्फ काेर्स की ग्रिल और ऊंची होती तो शायद हादसा रोका जा सकता था।

