BRD में समय पर पहचान व सटीक उपचार से बची 89 प्रतिशत प्रसूता की जान, सटीक उपचार से मिली राहत

गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कालेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में हुए हालिया अध्ययन ने गर्भावस्था व प्रसव के अंतिम चरण की गंभीर जटिलताओं पर चिंता जताई है। 100 महिलाओं पर किए गए इस अध्ययन में प्रसव के बाद सर्वाधिक 83 प्रतिशत महिलाएं अत्यधिक रक्तस्राव (पोस्टपार्टम हैमरेज-पीपीएच) से पीड़ित थीं। शेष में रक्तस्राव के अन्य कारण थे। इनकी स्थिति गंभीर थी। लेकिन समय से पहचान व सटीक उपचार से 89 प्रतिशत महिलाओं की जान बचा ली गई।

विभागाध्यक्ष डा. रूमा सरकार के निर्देशन में डा. स्मृति राय ने अध्ययन किया। ज्यादा खराब अवस्था में अस्पताल पहुंची 11 महिलाओं को नहीं बचाया जा सका। इसके कारणों में देर से रेफरल सामने आया।चिकित्सकों के अनुसार, इन सभी महिलाओं की स्थिति बेहद गंभीर थी और तत्काल चिकित्सा हस्तक्षेप की आवश्यकता थी।

40 महिलाओं की स्थिति अत्यंत गंभीर थी, इनमें से 29 को बचा लिया गया, हालांकि उनकी जान बचाने के लिए तीन से चार यूनिट तक रक्त चढ़ाना पड़ा। बीआरडी मेडिकल कालेज के रक्तकोष ने इन जरूरतमंदों को बिना डोनर के तत्काल रक्त उपलब्ध कराया, जिससे उनकी जान बचाई जा सकी।

अध्ययन में यह भी सामने आया कि जो महिलाएं स्वास्थ्य केंद्रों से रेफर होकर पहुंचीं, उनकी स्थिति अधिक गंभीर थी। उनमें शाक इंडेक्स (हृदय गति व उच्च रक्तचाप) अधिक और हीमोग्लोबिन का स्तर कम पाया गया। जो इस बात का संकेत है कि उन्हें समय पर उचित उपचार नहीं मिल सका या रेफरल में देरी हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि यह देरी मरीज की हालत को और बिगाड़ देती है और जीवन के लिए खतरा बढ़ा देती है।

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