
बाराबंकी। अयोध्या हाईवे पर डीसीएम के ब्रेक लगाने से पीछे चल रहीं तीन डबल डेकर बसें आपस में भिड़ गईं। हादसे में एक यात्री की मौत हो गई और छह लोग घायल हो गए। वहीं, सूरतगंज में स्कूल वैन और दुग्ध वाहन पिकअप की आमने-सामने की टक्कर में चालक समेत चार बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों को प्राथमिक उपचार किया गया।
लखनऊ-अयोध्या हाईवे पर गुरुवार सुबह करीब साढ़े छह बजे बारिश के दौरान अयोध्या की ओर जा रहे वाहनों की रफ्तार थम गई। बताया गया कि आगे चल रही डीसीएम के ब्रेक लगाने से पीछे आ रही तीन डबल डेकर बसें आपस में भिड़ गए। हादसे में बस्ती निवासी विनोद की मौके पर मौत हो गई, जबकि आशीष, आजाद, संजय और अजमेर अली समेत छह लोग घायल हो गए। पुलिस ने घायलों को उपचार के लिए भेजा और यातायात बहाल कराया।
स्कूल वैन पिकअप से भिड़ी
सूरतगंज: मोहम्मदपुर खाला के ढेढ़ी पुलिया स्थित गुरु कृपा पब्लिक स्कूल की वैन गुरुवार सुबह सुलतानापुर गांव से बच्चों को लेकर स्कूल जा रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वैन चालक नया था और वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका। सूरतगंज-सुढ़ियामऊ मार्ग पर तेलवाय गांव के निकट सामने से आ रही दुग्ध वाहन पिकअप से वैन की जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी तेज थी कि वैन का अगला हिस्सा पिकअप में फंस गया और मौके पर चीख-पुकार मच गई।
ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के बाद बच्चों और चालक को बाहर निकाला। एंबुलेंस से सभी घायलों को सीएचसी सूरतगंज पहुंचाया गया, जहां डॉ. शेख रिजवान ने प्राथमिक उपचार के बाद चालक समेत पांच लोगों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया। अधिकांश बच्चों के पैरों में फ्रैक्चर बताए गए हैं। सूचना मिलते ही पुलिस, स्कूल स्टाफ और अभिभावक अस्पताल पहुंच गए। बच्चों को घायल देख परिजन बदहवास नजर आए, जिन्हें पुलिस और अस्पताल कर्मियों ने समझाकर शांत कराया।
यह हुए घायल
सुलतानापुर निवासी सतीश के नौ वर्षीय बेटे शशांक और पांच वर्षीय बेटी अभिका, गांव के ही सतनाम का सात वर्षीय बेटा सुधांशु, सुशील का 15 वर्षीय बेटा पुष्पेंद्र तथा हाफिजपुर निवासी 30 वर्षीय वैन चालक तिलकराम गंभीर रूप से घायल हुए हैं। वैन में पीछे बैठे अन्य बच्चों को मामूली चोटें आईं, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया।
पहले भी हो चुके हैं हादसे
स्थानीय लोगों का कहना है कि स्कूल वाहनों की लापरवाही और बिना प्रशिक्षित चालकों के कारण क्षेत्र में पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। इसके बावजूद प्रशासन और स्कूल प्रबंधन नियमों के पालन को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहा है।

