
मुंगेर। नगर के बिंदवारा क्षेत्र में बुधवार की सुबह लगभग 6 बजकर 50 मिनट पर एक बड़ा हादसा हुआ। यहां स्थित करीब चार सौ वर्ष पुराने मंदिर का अवशेष अचानक तेज आवाज के साथ ढह गया। गिरने के दौरान लाल धुएं का गुबार उठने से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और लोग घरों से बाहर निकल आए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह दृश्य किसी प्रलय से कम नहीं था। वर्षों से खड़े तीन गुंबदों वाले इस ऐतिहासिक ढांचे का अवशेष कुछ ही पलों में मलबे में बदल गया।
रात की बारिश और मौसमीय हलचल के बाद हुआ ढहना
स्थानीय लोगों का कहना है कि घटना से करीब पांच घंटे पहले मंगलवार रात जिले में तेज बारिश और आंधी आई थी। इसके साथ ही हल्के भूकंप के झटके भी महसूस किए गए थे। हालांकि यह पुरातन संरचना लंबे समय से जर्जर अवस्था में थी, लेकिन प्राकृतिक हलचलों के बाद यह पूरी तरह ढह गई। ग्रामीणों के अनुसार, यह मंदिर लगभग सौ फीट ऊंचा था और तीन विशाल गुंबदों वाला ढांचा था, जो कासिमबाजार थाना क्षेत्र को एनएच-80 से जोड़ने वाली सड़क के किनारे स्थित था।
गनीमत रही, कोई जानमाल की क्षति नहीं
हादसे के वक्त इलाके में आम लोगों की आवाजाही कम थी, जिसके कारण किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली कि इतना बड़ा ढांचा गिरने के बावजूद कोई व्यक्ति चपेट में नहीं आया। घटना के बाद प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित घोषित किया।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया भयावह दृश्य
प्रत्यक्षदर्शी अनोज कुमार सिंह और राजकुमार ठाकुर ने बताया कि मंदिर गिरने का दृश्य इतना भयावह था कि कुछ क्षणों के लिए ऐसा लगा जैसे पूरा क्षेत्र किसी आपदा की चपेट में आ गया हो। तेज आवाज के साथ धूल और धुएं का गुबार उठने लगा, जिससे आसपास का वातावरण पूरी तरह ढक गया। लोगों का कहना है कि यह दृश्य देखकर हर कोई भयभीत हो गया और कुछ समय के लिए अफरातफरी का माहौल बन गया।
वर्षों से जर्जर था ऐतिहासिक ढांचा
स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, यह मंदिर कई दशकों से केवल अवशेष के रूप में खड़ा था। 75 से 80 वर्ष आयु के ग्रामीण मोहन सिंह और धार्मानंद सिंह ने बताया कि उन्होंने जब से होश संभाला है, तब से यह ढांचा इसी हालत में था। ग्रामीणों के अनुसार, लगभग सौ वर्ष पूर्व इस मंदिर से कीमती मूर्तियों की चोरी हो गई थी, जिसके बाद यह उपेक्षा का शिकार हो गया और धीरे-धीरे जर्जर होता चला गया।
पुरातत्व विभाग की अनदेखी पर उठे सवाल
स्थानीय अधिवक्ता राजीव कुमार सिंह और प्रोफेसर अनिल कुमार सिंह ने इस घटना पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि मुंगेर गजेटियर में इस ऐतिहासिक धरोहर का उल्लेख मिलता है, इसके बावजूद पुरातत्व विभाग की ओर से इसके संरक्षण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि समय रहते संरक्षण की दिशा में प्रयास किए जाते, तो यह ऐतिहासिक धरोहर आज भी सुरक्षित रहती।
ग्रामीणों में आक्रोश और दुख
घटना के बाद बिंदवारा क्षेत्र के लोगों में गहरा आक्रोश और दुख देखा जा रहा है। लोग मानते हैं कि यह केवल एक भवन का ढहना नहीं है, बल्कि उनकी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का नुकसान है। ग्रामीणों ने मांग की है कि क्षेत्र के अन्य प्राचीन धरोहरों के संरक्षण के लिए जल्द से जल्द ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
ऐतिहासिक पहचान बचाने की चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसे प्राचीन स्थलों की समय रहते मरम्मत और संरक्षण नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में कई अन्य धरोहर भी इसी तरह नष्ट हो सकती हैं। यह घटना न केवल स्थानीय इतिहास के लिए नुकसान है, बल्कि सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।

