
छपरा। सदर अस्पताल प्रशासन ने मेडिकल लीव के नाम पर हो रहे कथित फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाया है। अस्पताल के उपाधीक्षक की ओर से नई मानक कार्यप्रणाली (एसओपी) जारी करते हुए मेडिकल अवकाश स्वीकृति की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और कड़ा बना दिया गया है।
यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है और इसका पालन डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल कर्मी तथा लिपिकीय कर्मचारियों सहित सभी स्वास्थ्य कर्मियों को करना होगा।
नई व्यवस्था के तहत अब किसी भी कर्मचारी को मेडिकल लीव के लिए आवेदन के साथ पंजीकृत चिकित्सक द्वारा जारी प्रमाण पत्र देना अनिवार्य होगा। प्रमाण पत्र में डॉक्टर का रजिस्ट्रेशन नंबर, बीमारी का स्पष्ट विवरण और उपचार संबंधी जानकारी दर्ज रहनी चाहिए।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि कई मामलों में बिना गंभीर बीमारी के लंबे समय तक अवकाश लेने की शिकायतें सामने आ रही थीं, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया।
एसओपी के अनुसार, यदि कोई कर्मचारी बार-बार मेडिकल लीव लेता है या उसके द्वारा प्रस्तुत प्रमाण पत्र संदिग्ध प्रतीत होता है, तो उसे मेडिकल बोर्ड के समक्ष उपस्थित होना पड़ेगा। बोर्ड संबंधित कर्मचारी की स्वास्थ्य स्थिति की जांच कर अपनी रिपोर्ट देगा।
आवश्यकता पड़ने पर अस्पताल प्रबंधन द्वारा गठित टीम कर्मचारी के घर जाकर भौतिक सत्यापन भी करेगी। जांच टीम को 48 घंटे के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
अस्पताल प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि तीन दिन से अधिक बीमारी के बाद ड्यूटी पर लौटने वाले कर्मचारियों को फिटनेस सर्टिफिकेट देना अनिवार्य होगा।
निजी चिकित्सकों द्वारा जारी मेडिकल प्रमाण पत्र को सरकारी डॉक्टर से काउंटर साइन कराना जरूरी रहेगा। इसके अलावा बैकडेट में जारी प्रमाण पत्रों को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
प्रबंधन ने चेतावनी दी है कि जांच में यदि मेडिकल सर्टिफिकेट फर्जी पाया गया तो संबंधित कर्मचारी की छुट्टी रद कर दी जाएगी। साथ ही वेतन की वसूली और विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य वास्तविक मरीजों और जरूरतमंद कर्मचारियों को सुविधा उपलब्ध कराना तथा सेवा व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखना है।

