
गुरुग्राम। शहर से कचरा उठाने वाली पांच एजेंसियों के पास निर्धारित वाहन नहीं होने के कारण शहर के कई हिस्साें में कचरा उठाने का काम ठप हो गया है। शहर में कचरा संग्रहण के लिए करीब 600 वाहनों की जरूरत है, लेकिन नए टेंडर लागू होने के 18 दिन बाद भी केवल 225 वाहन ही सड़कों पर उतर पाए हैं।
हालात यह हैं कि लोग मजबूरन कचरा सड़कों और खाली प्लाटों में फेंक रहे हैं, जिससे जगह-जगह कचरे के ढेर लग गए हैं। अब नगर निगम ने एजेंसियों की जवाबदेही तय करने की तैयारी करते हुए सभी वाहनों की जांच करने और कमी मिलने पर जुर्माना लगाने का निर्णय लिया है।
नगर निगम ने घर-घर से कचरा संग्रहण के लिए करीब 23 करोड़ रुपये में पांच निजी एजेंसियों को छह महीने का ठेका दिया है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद व्यवस्था धरातल पर नहीं दिख रही। शहर के मुश्किल से 60 फीसदी घरों तक ही कचरा संग्रहण वाहन पहुंच पा रहे हैं, जबकि बाकी क्षेत्रों में लोग परेशान हैं।
नगर निगम ने छह महीने के लिए अस्थायी व्यवस्था लागू की थी, लेकिन एजेंसियां संसाधन जुटाने में पिछड़ गईं। अधिकारियों का कहना है कि नौ जुलाई से कार्यभार संभालने के बाद एजेंसियों को वाहन उपलब्ध कराने के लिए कुछ समय दिया गया है।
पुराने गुरुग्राम में नहीं पहुंच रहे वाहन
पुराने शहर के सेक्टरों और कालोनियों के कई घरों से कूड़ा नहीं उठने के कारण जगह-जगह कचरा सड़क के किनारे फेंका जा रहा है। वर्षा होते ही कचरा सड़ने लगता है और दुर्गंध फैल जाता है। इसके कारण लोगों के बीमार होने का खतरा रहता है।
बुधवार को सभी वाहनों की भौतिक जांच की जाएगी। जिन एजेंसियों के पास अनुबंध के अनुरूप वाहन और संसाधन नहीं पाए जाएंगे, उन पर नियमानुसार जुर्माना लगाया जाएगा।
-रविंद्र यादव, अतिरिक्त निगमायुक्त

